मिड डे मिल - नौनिहालों का हक खाने वाले घोर पापी, जानिए.. मिलता है यह भोगदंड...
नौनिहालों का हक छीनकर, अपने स्वार्थ के लिए संपत्ति जो इकट्ठा करते हैं, वे न केवल अनैतिक हैं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी घोर पापी माने जाते हैं। ऐसे कृत्य का परिणाम अंततः बुरा होता है. शास्त्र विद्वानों की मानें तो, गामी पीढ़ी तक को भी इसका दंड भुगतना पड़ सकता है।
गौरतलब है इन दिनों जहां केंद्र व राज्य सरकार द्वारा स्कूली नौनिहालों के लिए शिक्षा के साथ पोष्टिक आहार (एमडीएम) पर लाखों-करोड़ो खर्च किया जा रहा है, वहीं व्यवस्था को संचालित करने वाले कुछ स्कूल के प्रिंसिपल व स्थानीय प्रधान 'ठगहारी टीम' के साथ उक्त एमडीएम धनराशि को हड़पकर घोर पाप कार्य करने से बाज नहीं आ रहें हैं। सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से बच्चों का हक मारना अनैतिक है और समाज में इसे गलत माना जाता है. इसके बावजूद भी दोषपूर्ण मानसिकता वाले कुछ लोग नौनिहालों हक खाकर भी खुद को धनवान या इज्जतदार समझते हैं, जो कि बेईमानी है।
सामाजिक मुद्दा: नौनिहालों के एमडीएम की दुर्व्यवस्था मुख्यतः उत्तर प्रदेश में सामाजिक मुद्दा है. कभी-कभी एमडीएम जैसे मामले में ठगहारों के खिलाफ प्रबुद्ध वर्ग शासन की मदद से कानूनी आवाज भी उठाते हैं, जहां ऐसे बेईमानों को संविधान की अदालत तक खींच ले जाते हैं।
निष्कर्ष: दूसरों के, विशेषकर बच्चों के हक को हड़पना अनैतिक और गलत है, और इसका परिणाम जीवन में अशांति और बर्बादी लेकर आता है।
परिणाम: इस तरह के कृत्य से कभी बरकत नहीं होती और ऐसे लोग अंततः सर्वनाश की ओर जाते हैं। वक्त की अदालत में सबका हिसाब होता है, और ऐसा करने वालों को बाद में रोने का भी मौका नहीं मिलता।