भदोही के वरिष्ठ पत्रकार का यह बिस्फोटक लेख, बार-बार पढ़ रहें भाजपाई.!
भदोही भाजपा के नये पदाधिकारियों की सुची पर, कुछ व्यंग्यात्मक लेकिन यथार्थ विश्लेषण By वरिष्ठ पत्रकार हरीश सिंह
भदोही में कालीन के बाद अगर कुछ सबसे बारीक बुना जाता है, तो वह है 'राजनीतिक लिस्ट'। भाजपा की जिला कार्यसमिति की ताज़ा सूची क्या आई, मानों पूरे जिले के व्हाट्सएप ग्रुपों में 'इलाही रायता' फैल गया। 1 से लेकर 32 तक के इन नामों ने जिले की सियासत में वो खलबली मचाई है कि 'भदोही स्टेशन' से लेकर 'ज्ञानपुर रोड' तक बस यही चर्चा है। सूची में नाम छपते ही कल के 'भैया' आज 'माननीय' हो गए हैं। फेसबुक पर ऐसी-ऐसी फोटो निकल रही हैं जिनमें फूलों का हार इतना भारी है कि नेता जी का चेहरा ही नहीं दिख रहा। बधाई देने वालों का तांता लगा है, पर गौर से देखिये—आधे लोग तो बस इसलिए 'कमेंट' कर रहे हैं ताकि अगले चुनाव में अपना 'दावा' मज़बूत कर सकें। मिठाई की दुकानों पर भी रौनक है, पर खिलाने वाले से ज्यादा खाने वाले उत्साहित हैं। जिनका नाम लिस्ट में आते-आते 'बार्डर' से लौट आया, उनकी हालत उस कालीन जैसी है जिसमें डिज़ाइन तो बढ़िया थी पर 'रिजेक्शन' आ गया। वे अब ज्ञानपुर के किसी कोने में बैठकर चाय की चुस्की के साथ गहरा चिंतन कर रहे हैं—"अरे भाई, हम तो रात-दिन झंडा ढोए, पर मलाई तो वो मार ले गया जो कल तक दूसरी गली में टहल रहा था!" उनके चेहरे की 'मायूसी' इतनी गहरी है कि कालीन की गांठें भी शर्मा जाएं। भदोही की इस लिस्ट ने कइयों के कलेजे में 'मिर्ची' लगा दी है। "उसको उपाध्यक्ष बना दिया? अरे उसे तो बूथ का पता नहीं मालूम!"—ये वो जुमले हैं जो गुपचुप तरीके से हवा में तैर रहे हैं। जलन का आलम यह है कि लोग अब लिस्ट में जातिगत समीकरण और 'किचन कैबिनेट' का कनेक्शन ढूँढ रहे हैं। किसी का कद बढ़ा तो किसी का बीपी, और किसी का तो सीधा 'स्टेटस' ही गायब हो गया। लिस्ट में जो सबसे नीचे 'आईटी' और 'सोशल मीडिया' वाले नाम हैं, असली 'मजदूरी' उन्हीं की है। अब उन्हें अगले पांच साल तक ऊपर के 30 लोगों की 'महिमामंडन' वाली पोस्ट डालनी है। पद मिला बड़ों को, और अंगूठा घिसेगा इनका। बेचारे सोच रहे होंगे—"नाम तो आया, पर काम तो वही डिजिटल चौकीदारी वाला मिला!" भदोही की यह लिस्ट राजनीति का वो आईना है जिसमें चेहरा किसी का है और चमक किसी और की। किसी को बधाई की मिठाई मिली, तो किसी को मायूसी की कड़वाहट। पर लब्बोलुआब यही है कि—"पद रहे न रहे, पर भदोही की राजनीति में 'जलन' का धुआं कभी कम नहीं होता!"