डीएम साहब...न्याय कीजिये, यहां पंचायतराज नियमावली की उड़ी धज्जियां..
👉राजनैतिक लाभ के लिए, अकोढ़ा प्रधान ने आनन-फानन में बुलाई खुली बैठक
👉पंचायत सदस्यों को नहीं मिली है संविधानिक सुचना
👉कुछ सदस्य गर्मी की छूट्टी में हैं गाँव से बाहर
भदोही न्यूज़ नेटवर्क - भदोही जनपद के ज्ञानपुर ब्लॉक अंतर्गत अकोढ़ा गाँव में रविवार की दोपहर से अचानक प्रधान की तानाशाही खिलाफ आक्रोश फैल गया है, जिसका मुख्य कारण एक अखबार की कटिंग है. इस कटिंग के माध्यम से खुली बैठक बुलाई गई है. जबकि अकोढ़ा गाँव की एक दलित (ग्राम पंचायत सदस्या) श्रीमती सीता देवी ने आरोप जाहिर किया है कि पंचायत के कई सदस्य गर्मी की छूट्टियों में परिवार सहित गाँव से बाहर हैं और खुली बैठक की नियमावली का खुलेआम उल्लंघन करके यह तानाशाही पूर्ण बैठक बुलाई गई।
इस मामले में श्रीमती सीता देवी आगे कहती हैं कि पंचवर्षीय कार्यकाल के आखिरी दिन तपती व चिलचिलाती धूप में अचानक प्रधानजी द्वारा अखबार की कटिंग से संदेश भेजवाकर आनन-फानन में खुली बैठक बुलाया जाना पूर्ण रूप से गैर संविधानिक है. यह जांच का विषय कि आखिर इस #गैर_संविधानिक मिटिंग के पीछे प्रधानजी की मंसा क्या है....आखिर ५ सालों में रोही गाँव से अकोढ़ा आकर बसे सजातियों से ग्राम समाज की कई बिगहा जमीन खाली करवाने के बजाय, आवंटन की यह जुगत कहां से सुझ रही है. फिलहाल ग्राम पंचायत के अधिकांश सदस्यों सहित जागरूक ग्रामवासियों ने यह बैठक रद्द करने की मांग की है.
वहीं अल्पसंख्यक समाज के ग्राम पंचायत सदस्य हारून हासमी व हैदर अली अनौपचारिक तौर पर कहते है कि पंचवर्षीय कार्यकाल के आखिरी दिन 'जमीन आवंटन प्रस्ताव' अचानक लाकर दो धर्मों व जातियों में आपसी तनातनी कराने की नियत साफ नजर आ रही है, ताकि वोट का लाभ मिल सके क्योंकि दलित व पिछड़े वर्ग को पूर्व में मिले आवंटन पर कब्जा दिलवाने में प्रधान फेल साबित हुए है। दूसरी तरफ इस रणनीति में प्रधानपुत्र की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जिस पर कुछ लोगों से भूमि आवंटन के नाम पर आंतरिक रूप से लाखों वसूली की चर्चा भी सुनाई पड़ रही है।
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