हाँ..'हैंडपंप रिबोर' कराया हूँ.!
७ हजार में 'हैंडपंप' रिबोर, खुलेआम करवाया हूँ।
सामग्री 'रिपेयरिंग मद' से, उसमें सब लगवाया हूँ।।
गिट्टी-बालू-सीमेंट, खडंज्जा कोष से मंगवाया हूँ।
बालूजल देख मुस्काया, वाश कहीं ना कराया हूँ।।
झटपट दौड़ 'ज्ञानपुर' तक, कर्मठ 'खुद' लगाया हूँ।
30/32 हजार का बिल, जीएसटी में बनवाया हूँ।।
सचिव 'साहब' से डोंगल, मस्कामार लगवाया हूँ।
पेमेंट 'बिलाधीश' फर्म, खटाखट तब पहुंचाया हूँ।।
जीएसटी एमाऊंट काट, फर्म से ''कैश'' उठाया हूँ।
इधर कमीशन-ऊधर मजदूरी, सबको सलटाया हूँ।।
बुद्धि के दम पर देखो, हैंडपंप 'रिबोर' कराया हूँ।
तब जाकर महोदय, सिर्फ '१५ हजार' बचाया हूँ।।
वाश कराने में '2 हजार' कभी, कहीं ना लगाया हूँ।
चबूतरा शामिल नहीं, सबको 'सप्रेम' समझाया हूँ।।
बालू या पीला 'जल' देख, वो पीछे-पीछे गरियाते हैं।
दलाल-कमीशनखोर कह, अक्सर 'सभा' बुलाते हैं।।
पीड़ा हमरी समझों साहब, लाखों खर्च लगाया हूँ।
वर्षों 'कुटिनीति' भटका, तब ऐ '५ साल' पाया हूँ।।
सुनील तिवारी 'बहुरूपीय'
(वरिष्ठ पत्रकार, युवा व्यंग्यकार)
संवाद सुत्र नं. - 9892746387
Disclaimer - यह 'व्यंग्यकार' की मौलिक व यथार्थ रचना है. इससे किसी की 'कार्यशैली' मेल खाना, मात्र 'संयोग' माना जाएगा.