मानवता से पुण्य प्राप्त होता है स्वामीहरिहरानंद

 

 

 

कोइरौना—राष्ट्रीय रामायण मेला सीतामढी के लवकुश इण्टर कालेज में चल रहे कथा के सातवें दिन शक्ति पीठाधीश्वर प्रयाग श्री हरिहरानन्द महाराज ने व्यासपीठ से भरत चरित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भरत जी का चरित जन्मजन्मांतर तक गाई जाय तो वो भी कम ही होगा ।चित्रकूट में भगवान के प्रवास के दौरान भरत जी सेना लेकर वहाँ पहुंचे तो भगवान को सूचना मिली । भगवान राम भाव विह्वल हो गये कि भरत जी के साथ गुरूदेव , माताएं एवं अन्य स्वजनो को कैसे अयोध्या भेजेगें चिंतित हो गये । वही लक्ष्मण जी ने धनुष उठा लिया और कहा कि इस कुबंधु राजमद में चूर अभिमानी को समर में सुला दूंगा , तब श्री राम ने लक्ष्मण भैया के निति की बखान करते हुए कहा कि भरत जी जैसा सुबंधु इस जगत में कोई नही है । कथा को गति देते हुए महाराज ने कहा कि जो राजा गूरू और संतो से दूर रहते हैं वे राजमद मे मधान्ध होते हैं जबकि भरत जी को परमहंश कहा क्योंकि वो संतो और सत्संगो में लीन रहते हैं । भरत और रामजी के मिलन प्रसंग पर संक्षेप मे बताते हुए महाराज ने कहा कि भरत जी ने कहा कि मेरे जैसे पापी के पाप के कारण आप को बनवास मिला तब रामजी ने सहजता से भरत जी को समझाते हुए कहा कि मेरे पुण्य व तुम्हारे पाप की वजह से बन में मुझे संतों के दर्शन प्राप्त हुए तो यह पाप करोड़ो पुण्य से पावन है ।कथा में उपस्थित श्रोताओं को महाराज ने मानवता के कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा पाप से अर्जित धन से दूर रहने को कहा । श्रोताओं में प्रमुख रुप से कल्पवृक्ष कुटी सेमराध के करूणा शंकर दास महाराज,राम प्यारे शुक्ल,मुन्ना पाण्डेय,राम विधान यादव,श्यामजी सेठ,माताचरन तिवारी,हौशिला प्रसाद मिश्र,मनोज शास्त्री सहित बड़ी संख्या में महिला पुरूष श्रोता मौजूद रहे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Follow by Email
Facebook
Facebook
YouTube
INSTAGRAM