बनारसी तहजीब का अनोखा रंग – माथे पर तिलक लगाए हिन्दुओं ने मुसलमानों के लिये परोसी इफ्तार

पंचगंगा घाट आलमगीरी धरहरा मस्जिद में दिखी कौमी एकता की बेमिसाल नजीर । वाराणसी. आज गंगा के पावन तट पर ऐतिहासिक शाही आलमगीर मस्जिद (धरहरा) में वार्ड 53 राजमंदिर के पार्षद अजीत सिंह की सदारत में आयोजित रोजा इफ्तार पार्टी में कौमी एकता की बेमिसाल नजीर दिखी। माहे रमज़ान के 24वें रोजे को आयोजित इस इफ्तार में बड़ी तादाद में रोजेदार ने मग़रीब के अजान के बाद खजूर रोजा खोला और शर्बत से प्यास बुझाई।
इस इफ्तार पार्टी में खास बात यह रही कि चारो तरफ से हिन्दू धार्मिक स्थलों से घिरे इस मस्जिद में इलाक़े के तमाम हिन्दू भाईयों ने मस्तक पर केशरिया चंदन लगाये नौजवानों की रोजेदारों के प्रति एहतेराम से एक बार पुनः गंगा- जमुनी तहज़ीब को बल प्रदान किया। रोजेदारों की सेवा में पार्षद अजीत सिंह के साथ ही सैकड़ों नवयुवकों ने भी रोजेदारों की खुले दिल से खिदमत की। इफ्तार में लजीज व्यंजन परोसे गए। पार्षद अजीत सिंह ने बताते हैं कि बनारस विश्व पटल पर अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिये जाना जाता है। यहां के मंदिरों के घंटा घड़ियाल की आवाज मस्जिदों की अजानों की सदाका अनोखा संगम हिन्दू-मुस्लिम एकता की बेमिसाल नजीर पेश करती है। जिस तहजीब की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है दरअसल उसका उद्गम स्थल बनारस ही है।

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