अविश्वास प्रस्ताव में विपक्षियों के हार के बावजूद भी राहुल गांधी की जीत है

पिछले कई महीनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर यदि गौर किया जाये तो देश के कई क्षेत्रीय दल मिलकर नरेन्द्र मोदी को हटाने के लिए महागठबंधन बना रहे हैं किन्तु इसका नेता या प्रधानमंत्री पद का दावेदार कांग्रेस के राहुल गांधी को मानने से बच रहे थे किन्तु कांग्रेस को सही अवसर पर नरेन्द्र मोदी के सामने मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी को बनाने का एक सुनहरा मौका क्षेत्रीय दलों ने हाथ में दे दिया। यह निश्चित है कि अविश्वास प्रस्ताव में सरकार को गिराने के लिए विपक्षियों के पास जादुई आंकड़ा से 150 सीट से ज्याद की कमी है जबकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार के पास 274 के जादुई आंकड़े से ज्यादा सांसद मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में सरकार का गिरना असम्भव है फिर भी राहुल गांधी विपक्षियों का नेता बनकर इस प्रस्ताव के माध्यम से अपनी जीत बना लिये क्योंकि त्रिणमूल कांगेस की नेता ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री है जो लोकसभा में सदस्य नहीं है इसलिए उपस्थित नहीं रहेगी। मायावती जो राज्यसभा लोकसभा कहीं की सदस्य नहीं है वे भी सदन में मौजूद नहीं रहेंगीं। अखिलेश सिंह यादव यद्यपि कि उन्होंने पहले ही यह घोषणा किया है कि हमें दिल्ली नहीं जाना फिर भी वे सदस्य नहीं है ऐसी स्थितियों में कांग्रेस के पास 2019 के चुनावी महासमर में जाने से पहले एक सुनहरा अवसर अविश्वास प्रस्ताव के रूप में हाथ में लगा है कि राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी के सामने सवाल जवाब करेंगे और प्रधानमंत्री को उनके सवालों के जवाब देना है जिससे भारतीय जनमानस में यह संदेश जायेगा कि नरेन्द्र मोदी का वास्तविक मुकाबला राहुल गांधी से है किसी क्षेत्रीय दल से नहीं।

(लेखक एन. कुमार)

 

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