नए प्रकार के काली निर्माण में लगे हैं उद्यमी बनारस के कालीन मेले को लेकर भदोही कालीन निर्माताओं में खूब उत्साह दिखाई पड़ रहा है रात दिन एक किए हुए हैं कालीन बुनकर तैयार कर रहे हैं नए-नए कालीन

भदोही। वाराणसी के बड़ा लालपुर में स्थित ट्रेड फेसिलिटी सेंटर एंड क्राफ्ट्स म्यूजियम में कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) द्वारा 21 से 24 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाले अंतराष्ट्रीय कालीन मेले को लेकर उद्योमियों में उत्साह है। इसके लिए उनके द्वारा जोरो-शोरों के साथ उत्पाद को तैयार कराया जा रहा है। ताकि मेले में उस उत्पाद को प्रदर्शित कर ज्यादा से ज्यादा निर्यात आर्डर प्राप्त किया जा सके।
इस बाबत कालीन उद्यमी व आल इंडिया कार्पेट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद सचिव हाजी शाहिद हुसैन अंसारी ने बताया कि भारतीय कालीन उद्योग कड़ी प्रतिस्प्रदा की दौर से गुजर रहा है। उसके सामने चाइना जैसे देश के हैण्डमेड कार्पेट चुनौता बन कर खड़ा है। हालाकि हैण्डमेड कार्पेट आफ भदोही अंतराष्ट्रीय बाजार मे अपनी धमक को कायम रखने आज भी कामयाब है। प्रतिस्पर्धी को ध्यान में रख कर उत्पाद को उद्योमियों द्वारा तैयार कराया जा रहा है।
वही कालीन उद्यमी हाजी सौदागर अली अंसारी ने बताया कि हैण्डमेड कार्पेट का कोई जवाब ही नही है। यह भले ही महंगें होते है। लेकिन देखने मे खुबसूरत के साथ ही काफी टिकाऊ भी होती है। वाराणसी में लगने वाले कालीन मेले के लिए अच्छे कार्पेट को तैयार कराया जा रहा है। ताकि वह मेले में आने वाले विदेशी आयातकों को लुभाने में कामयाब हो और अधिक से अधिक निर्यात आर्डर मिल सके।कालीन उद्यमी ओम प्रकाश गुप्ता का कहना रहा कि 21 से 24 अक्टूबर के बीच वाराणसी के बड़ा लालपुर में स्थित ट्रेड फेसिलिटी सेंटर एंड क्राफ्ट्स म्यूजियम में आयोजित होने वाले कालीन मेले से काफी उम्मीदे है। उस उम्मीद को लेकर मेले की तैयारी की जा रही है। मेले से बेहतर व्यापार संभावनाएं लिए कालीन नगरी के उद्यमी मेले में प्रतिभाग करेंगे। उम्मीद है कि इस बार का कालीन मेला अच्छा जाएगा। कालीन उद्यमी दिलीप गुप्ता का मानना है कि इस समय कालीन उद्योग बंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसी स्थिति में मेले को लेकर उद्योमियों में उत्साह है। इसके लिए नई नई बेराइटी के कालीनों को तैयार किया जा रहा हे। जो देखने में आकर्षक होने के साथ ही साथ सस्ती और टिकाऊ भी हो। जिसे देखकर आयातक उसकी ओर आकर्षित हो सके। मेले में ज्यादा से ज्यादा निर्यात आर्डर मिलेगा तो मंदी की काली छाया भी समाप्त हो।

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